सोमवार। बंद दरवाज़ा।
मेरी 15 साल की बेटी लिली घर आई, “ठीक” बुदबुदाई और कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया। लगातार तीसरा दिन। मैं गलियारे में खड़ी थी, खटखटाने के लिए हाथ आधा उठा हुआ था। न पूछूँ तो सोचेगी मुझे परवाह नहीं। पूछूँ तो बिल्कुल बंद हो जाएगी। इसके बजाय मैंने Wisayo खोला।
आज का सुझाव: लिली को आज शायद थोड़ी जगह चाहिए। आपकी ताक़त शांत मौजूदगी है: बिना दबाव डाले उपलब्ध रहना।
सुझाया गया सवाल: “लिली को बिना दबाव डाले कैसे दिखाऊँ कि मैं उसके साथ हूँ?”
मैंने टैप करके जवाब दो बार पढ़ा। फिर दरवाज़ा नहीं खटखटाया। उसका पसंदीदा पास्ता बनाया और दरवाज़े के पास एक प्लेट रख दी। साथ में पर्ची: ज़रूरत हो तो मैं यहीं हूँ। एक घंटे बाद प्लेट ख़ाली लौटी। पर्ची नहीं थी। मैं रसोई में बैठकर थोड़ा रोई। सुकून के आँसू थे।



