सोमवार। पहले समझना।
सुबह उठी तो मन था कि शाम को फिर कोशिश करूँ। फिर ख़ुद को मना किया, फिर दोबारा मन बदला। Wisayo खोला, लगभग इस उम्मीद से कि वही मेरे लिए फ़ैसला कर दे।
आज का सुझाव: टॉम के साथ मेरी ताक़त उसकी भावनाएँ समझने में थी। कुछ नया उठाने से पहले यह जानने का अच्छा दिन कि उसे क्या परेशान कर रहा है।
सुझाए गए सवालों में मैंने “मेरे मन में कुछ और है” चुना
चैट में लिखा: “कैसे पता करूँ कि आजकल टॉम के मन में क्या चल रहा है?” Wisayo ने सीधी बात कही: बड़ा विषय अभी छोड़ो, उसके हफ़्ते के बारे में पूछो और बातचीत को मोड़े बिना उसे बोलने दो। सुबह की कॉफ़ी पीते हुए दो सवाल और पूछे: “अगर वह बस कह दे कि सब ठीक है तो?” और “कैसे दिखाऊँ कि मैं सच में सुन रही हूँ?”
उस शाम डिनर पर मैंने घर बदलने का ज़िक्र ही नहीं किया। उसके हफ़्ते के बारे में पूछा और बस सुना। टॉम ने काम के उस दबाव की बात की जो वह कई हफ़्तों से मुझसे छिपाए हुए था। अचानक दोनों “ना” बिल्कुल अलग लगने लगे। बात कभी मेरे माता-पिता की थी ही नहीं।